कल्याण योजनाएँ — क्या-क्या है, और माँगने असल में कहाँ जाना है

पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए जितनी मदद मौजूद है, उतनी ज़्यादातर परिवार कभी माँगते ही नहीं — योजनाएँ छुपी हुई नहीं हैं, बस कोई यह नहीं बताता कि कौन सी योजना किस दफ़्तर से चलती है। यह पन्ना वही नक़्शा है। हम योजनाओं के नाम और खटखटाने वाले दरवाज़े बताते हैं; मदद की मौजूदा रकमें आदेश से बदलती रहती हैं, इसलिए आँकड़ों के लिए हम आधिकारिक पन्नों का रास्ता दिखाते हैं — बासी पड़ने वाले आँकड़े नहीं छापते।
- 1 ज़िला सैनिक बोर्ड में एक बार registration डिस्चार्ज बुक + PPO (पेंशन भुगतान आदेश) — इसी से सारे दरवाज़े खुलते हैं
- 2 KSB पोर्टल पर आवेदन ksb.gov.in — योजना चुनिए, फ़ॉर्म भरिए
- 3 ZSB काग़ज़ जाँचता है ज़िला बोर्ड जाँचकर आगे भेजता है
- 4 मदद बैंक में पहुँचती है सीधे दर्ज खाते में
मुख्य दरवाज़ा: KSB और उसके बोर्ड
केंद्र की ज़्यादातर कल्याण मदद केंद्रीय सैनिक बोर्ड (KSB) से चलती है, जो राज्य सैनिक बोर्डों (राज्य स्तर) और ज़िला सैनिक बोर्डों (ज़िला स्तर) के ज़रिए काम करता है। लगभग हर चीज़ का पहला दरवाज़ा आपका ज़िला सैनिक बोर्ड है — वहाँ पूर्व सैनिक या विधवा के तौर पर registration ही बाक़ी सब खोलती है।
⚠ रैंक की वह शर्त जो ज़्यादातर परिवार नहीं जानते इनमें से ज़्यादातर मदद (penury, पढ़ाई, बेटी की शादी) हवलदार या उसके बराबर तक की रैंक के लिए है; दिव्यांग-संतान वाली मदद JCO और बराबर तक। सिर्फ़ अनाथ-संतान वाली मदद हर रैंक के लिए है। किसी मदद पर उम्मीद बाँधने से पहले रैंक की शर्त देख लीजिए।
- Penury grant — बिना-पेंशन पूर्व सैनिक (हवलदार तक) या उनकी विधवा, उम्र 65 साल या ज़्यादा। एक बात याद रखिए: दर महीने की है पर पैसा साल में एक बार, इकट्ठा मिलता है — हर महीने आने की उम्मीद मत रखिए।
- पढ़ाई की मदद — हवलदार तक के पूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए, कक्षा 1 से graduation तक (दो बच्चे); विधवाओं के लिए दो साल के PG की भी व्यवस्था है।
- बेटी की शादी की मदद — हवलदार तक के पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं के लिए; हर बेटी पर, ज़्यादा से ज़्यादा दो, और विधवा के दोबारा विवाह पर भी। शादी के 180 दिन के अंदर आवेदन कीजिए — यही तारीख़ चूकने से सबसे ज़्यादा आवेदन ख़ारिज होते हैं।
- अनाथ-संतान की मदद — हर रैंक के लिए: 21 साल से कम का अनाथ बेटा या अविवाहित अनाथ बेटी, ज़िला सैनिक बोर्ड की सिफ़ारिश पर।
- 100% दिव्यांग संतान की मदद — JCO और बराबर तक के पूर्व सैनिकों के लिए, सैन्य या सरकारी अस्पताल के प्रमाणपत्र के साथ।
इनके आवेदन KSB पोर्टल पर चलते हैं, काग़ज़ों की जाँच ज़िला सैनिक बोर्ड करता है। KSB कुछ और योजनाएँ भी चलाता है जिनका ब्योरा इस पन्ने पर नहीं — बिना-पेंशन पूर्व सैनिकों का इलाज, विधवाओं की vocational training, गंभीर बीमारी में मदद, चलने-फिरने के उपकरण और घर के क़र्ज़ के ब्याज में छूट। इनमें से अभी कौन सी खुली है, यह ज़िला सैनिक बोर्ड से पूछिए।
कुछ पुरानी एक-बार की मदद, जिनके बारे में परिवार आज भी पूछते हैं — अंतिम संस्कार और घर-मरम्मत — अब KSB की मौजूदा योजना-सूची में नहीं दिखतीं (3 अगस्त 2026 को देखा)। कोई कहे कि ये चालू हैं, तो भरोसा करने से पहले ज़िला सैनिक बोर्ड से पूछ लीजिए।
Scholarship
- प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (PMSS) — पूर्व सैनिकों और पूर्व Coast Guard के बच्चों तथा विधवाओं के लिए, professional course के छात्रों को; आवेदन हर शैक्षणिक वर्ष online। तीन शर्तें, जिनसे ज़्यादातर आवेदन ख़ारिज होते हैं: सिर्फ़ पहले साल में दाख़िला (दूसरे साल वाला छात्र apply नहीं कर सकता), qualifying परीक्षा में कम-से-कम 60%, और खिड़की का 30 नवंबर के आसपास बंद होना। एक पूर्व सैनिक के ज़्यादा से ज़्यादा दो बच्चे।
- राज्यों की योजनाएँ — कई राज्य राज्य सैनिक बोर्ड के ज़रिए अपनी scholarship और छूट की योजनाएँ चलाते हैं — एक बार जाकर पूछ आना वसूल है कि आपका राज्य ऊपर से क्या देता है।
शहादत और मुश्किल वक़्त के कोष
- Armed Forces Battle Casualties Welfare Fund — शहादत और युद्ध-हताहत परिवारों के लिए ex-gratia मदद।
- रक्षा मंत्री पूर्व सैनिक कल्याण कोष (RMEWF) — ऊपर बताई penury, पढ़ाई, शादी, अनाथ और दिव्यांग-संतान वाली मदद इसी कोष से चलती है; पैसा Armed Forces Flag Day Fund से आता है। पहले इसका नाम "रक्षा मंत्री विवेकाधीन कोष" था, और पुराने काग़ज़ों में वही नाम मिलता है।
- AGIF / AFGIS की benevolent योजनाएँ — हर सेवा के अपने कोष की अपनी मदद है; AGIF (थल सेना समूह बीमा निधि) क्या-क्या देता है, AGIF पन्ने पर देखिए।
⚠ एक आदत जिससे सारे दरवाज़े खुलते हैं अपने ज़िला सैनिक बोर्ड में registration कराइए — पूर्व सैनिक या विधवा, डिस्चार्ज बुक और PPO के साथ। ऊपर की हर मदद वही registration माँगती है। एक बार, अच्छे दिनों में करा लीजिए — ताकि मुसीबत आने से पहले काग़ज़ मौजूद हों।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सबसे पहला काम क्या करें?
अपने ज़िला सैनिक बोर्ड में registration कराइए — पूर्व सैनिक या विधवा के तौर पर, डिस्चार्ज बुक और PPO लेकर। इस पन्ने की हर मदद वही registration माँगती है; अच्छे दिनों में करा लीजिए, ताकि मुसीबत से पहले काग़ज़ मौजूद हों।
मुझे कोई पेंशन नहीं मिलती — क्या फिर भी मदद है?
हाँ — penury grant ठीक इन्हीं के लिए है: हवलदार तक के बिना-पेंशन पूर्व सैनिक या उनकी विधवाएँ, उम्र 65 साल या ज़्यादा। रास्ता KSB के बोर्डों से होकर जाता है। एक बात पहले से जान लीजिए: दर महीने की है, पर पैसा साल में एक बार, इकट्ठा आता है।
बेटी की शादी की मदद कितनी है?
रकमें आदेश से बदलती रहती हैं, इसलिए हम ऐसा आँकड़ा नहीं छापते जो पुराना पड़ जाए — मौजूदा रकम ksb.gov.in पर है। ज़्यादा काम की बातें: यह हर बेटी पर लागू है (ज़्यादा से ज़्यादा दो), रैंक की सीमा हवलदार या बराबर है, और आवेदन शादी के 180 दिन के अंदर पोर्टल पर पहुँचना चाहिए, ZSB की जाँच के साथ।
PM Scholarship कब खुलती है?
हर शैक्षणिक वर्ष, online — खिड़की आम तौर पर 30 नवंबर के आसपास बंद होती है। छात्र के काग़ज़ और अपनी ESM registration पहले से तैयार रखिए। दो शर्तें परिवार सबसे ज़्यादा चूकते हैं: apply सिर्फ़ पहले साल वाला छात्र कर सकता है, और qualifying परीक्षा में 60% या ज़्यादा चाहिए।
यह जानकारी कहाँ से ली गई
- ksb.gov.in — केंद्रीय सैनिक बोर्ड: penury, पढ़ाई, बेटी की शादी, अनाथ-संतान और दिव्यांग-संतान वाली मदद के अपने-अपने scheme पन्ने, हर एक की रैंक-सीमा और शर्तों के साथ। 3 अगस्त 2026 को पढ़े गए — ऊपर की हर रैंक-शर्त, उम्र और तारीख़ वहीं से है।
- PMSS की रकम, पात्रता और पहले-साल/60% वाले नियम — KSB का PMSS खंड और desw.gov.in।
- दिव्यांग-संतान की मदद — रक्षा मंत्रालय/DESW की चिट्ठी सं. 5(1)2021-D(Res-II), 09.07.2021 से बढ़ी। सिर्फ़ इसी मदद का आदेश-नंबर KSB अपने पन्ने पर छापता है; बाक़ी पर कोई आदेश-नंबर नहीं दिया गया, इसलिए वहाँ scheme पन्ना ही हवाला है — जो है, वही ईमानदारी से।
- शहादत — Armed Forces Battle Casualties Welfare Fund, desw.gov.in और 22 नवंबर 2019 की PIB रिलीज़।
- रकमें सरकारी आदेश से बदलती रहती हैं — ताज़ा आँकड़ा हमेशा ksb.gov.in के scheme पन्ने पर, इस पन्ने पर नहीं।
यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। पात्रता और रकमें लागू आदेश और हर योजना को चलाने वाले बोर्ड तय करते हैं। सैनिक डेस्क एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।